अमेरिका के सामने नई चुनौती: मौजूदा पेट्रोल-डीजल कारों की उम्र लंबी, इलेक्ट्रिक कारों को जगह बनाने में लगेंगे कई साल

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3 घंटे पहले

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दुनिया भर में सरकारें और ऑटो-मेकर्स इलेक्ट्रिक वाहनों को जलवायु परिवर्तन से निपटने का प्रमुख साधन मान रहे हैं। हालांकि इस तकनीक का ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर वास्तविक असर दिखने में कई दशक नहीं तो कई साल लग ही जाएंगे। इसकी एक बड़ी वजह है। दरअसल, सड़कों पर दौड़ रहीं मौजूदा पेट्रोल-डीजल की गाड़ियां लंबे समय तक टिकी रहेंगी।

विश्लेषकों का कहना है कि गाड़ियों का पूरा बेड़ा बदलने की रफ्तार काफी धीमी होगी, क्योंकि पेट्रोल-डीजल से चलने वाली ये वाहन पहले से ज्यादा भरोसमंद और मजबूत हैं। इनमें टूट-फूट भी कम होती है। आर्थिक पूर्वानुमान फर्म आईएचएस मार्किट के अनुसार अमेरिका में लाइट ड्यूटी व्हीकल यानी हल्के वाहन औसतन 12 साल पुराने हैं। वहीं, 2002 में यह औसतन 9.6 साल पुराने थे। आईएचएस मार्किट में ऑटोमेटिव आफ्टर मार्केट एनालिसिस के विशेषज्ञ टोड कैंपा का कहना है कि विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के चलते इंजीनियरिंग की गुणवत्ता में समय के साथ काफी सुधार आया है।

हर साल 1.7 करोड़ वाहन खरीदते हैं अमेरिकी लोग
अमेरिकी लोग हर साल करीब 1.7 करोड़ पेट्रोल-डीजल की गाड़ियां खरीदते हैं। इनमें से कार और हल्के ट्रक कई बार बेचे और खरीदे जाने के बाद 10 से 20 साल तक सड़कों पर दौड़ते हैं। इसके बाद भी हर साल अमेरिका इस्तेमाल किए हुए हजारों वाहन इराक और मेक्सिको जैसे देशों को निर्यात कर देता है। जहां इन्हें रिपेअर करके और लंबे समय तक चलाया जाता है।

नए पेट्रोल वाहन बनाने रोके तो और बढ़ेगी मुश्किल
अमेरिका को वाहनों से होने वाले ग्रीन-हाउस उत्सर्जन को कम करना बेहद कठिन होगा। अमेरिका में होने वाले कुल उत्सर्जन का एक तिहाई वाहनों से ही होता है। कुछ आर्थिक शोध बताते हैं कि अगर ऑटो मेकर्स ने नए पेट्रोल-डीजल वाहनों की बिक्री धीरे-धीरे बंद कर दिया तो मुमकिन है कि पुराने वाहन और लंबे समय तक बने रहें, क्योंकि ग्राहक महंगी इलेक्ट्रिक कारों की जगह सस्ते पुराने वाहनों को और लंबे समय तक चलाते रहें।
इसलिए नीति निर्माताओं को दूसरी रणनीतियों पर भी विचार करना चाहिए। बाय बैक और पुरानी गाड़ियों को कबाड़ में बदलने जैसी नीतियों को पहले ही अपनाया जा चुका है। दूसरी नीतियों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइकिल और पैदल चलने को बढ़ावा देकर कार पर निर्भरता कम करने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।

ऊबर जैसी कंपनियों को तेजी से करें इलेक्ट्रिफाई
यात्री वाहनों से उत्सर्जन को कम करने की राह में आने वाली बाधाओं पर हुए एक अध्ययन की अगुवाई करने वाले कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी के स्नातक छात्र अब्दुल्ला अलरफज का कहना है कि नीति निर्धारकों को राइड शेयरिंग वाली सुविधाओं जैसे ऊबर और लिफ्ट को तेजी से इलेक्ट्रिफाइ करना चाहिए, क्योंकि यह वाहन औसतन ज्यादा चलते और जल्द ही रिटायर हो जाते हैं।
अमेरिकी सरकार पुरानी गाड़ियों को नई से बदलने के लिए रिबेट देने की योजना भी शुरू कर सकती है। सरकार कैश फॉर क्लंकर्स योजना चला चुकी है। इसके तहत सरकार ने 7 लाख पुरानी कारों को नई कारों से बदलने पर करीब 21 हजार करोड़ रुपए खर्च किए थे।

पेट्रोल-डीजल पर ज्यादा टैक्स का भी सुझाव
एमआईटी स्लोअन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के अर्थशास्त्री क्रिस्टोफर आर नाइटल का कहना है कि कैश फॉर क्लंकर्स की नीति के बजाय पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर कार्बन उत्सर्जन पर टैक्स लगाना ज्यादा प्रभावी है। इसी तरह क्लीन वाहन खरीदने वाले और कम ड्राइव करने वालों को इन्सेंटिव देना चाहिए। हालांकि राजनीतिक असर के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम अभी तक बढ़ाये नहीं गए हैं।

पेरिस और हीडलबर्ग जैसी नीति अपनाएं
अमेरिकी शहर भी अपनी हाउसिंग और परिवहन को नए सिरे से व्यवस्थित कर सकते हैं, ताकि लोग आसपास आने-जाने के लिए वाहनों पर कम निर्भर हों। दुनिया के कुछ शहरों को इसमें सफलता मिली है। 1990 के बाद से पेरिस ने नई बस और रेल-लाइन, साइकिल लेन, फुटपाथ का विस्तार और शहरी सीमा में वाहनों पर पाबंदी लगाकर वाहनों पर निर्भरता को 45% तक कम कर दिया। जर्मनी के हीडलबर्ग शहर ने कारों से होने वाले उत्सर्जन कम करने को अपनी योजना का केंद्रीय मुद्दा बनाया है।

ई-वाहन अपनाना भी आसान नहीं, ग्रिड का विस्तार करना होगा
नेचर क्लाइमेट चेंज ने एक ताजा अध्ययन में बताया कि अमेरिका में वाहन उत्सर्जन में भारी गिरावट के मायने क्या हैं? अध्ययन के अनुसार यदि अमेरिकी लोग मौजूदा दर से ही ड्राइविंग में बढ़ोतरी करते रहे तो देश को 2050 तक करीब 35 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरत होगी। यह एक चुनौतीपूर्ण आंकड़ा है।

ऐसा करने के लिए न केवल देश की इलेक्ट्रॉनिक ग्रिड को व्यापक विस्तार की जरूरत पड़ेगी बल्कि लिथियम और कोबाल्ट जैसी बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की भारी मात्रा में जरूरत पड़ेगी। अध्ययन में पाया गया कि अगर अमेरिकी लोग अगले 30 सालों तक वाहनों यात्रा को सपाट रखने में कामयाब रहते हैं तो केवल 20.5 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरत होगी। इससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती की जा सकेगी।

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