इतिहास में आज: उस भारतीय जनरल का जन्मदिन, जो पिता से बगावत कर सेना में शामिल हुआ और पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए!

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22 मिनट पहले

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1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध। इसके ठीक दो साल पहले ही चीन से मिली हार के बाद भारतीय सेना का मनोबल थोड़ा गिरा हुआ था, लेकिन 1971 के युद्ध में भारतीय सेना ने जो कारनामा किया, वो आज भी इतिहास में दर्ज है। 3 दिसंबर को पाकिस्तानी सेना ने भारत पर हमला कर दिया। भारत ने हमले का इतना करारा जवाब दिया कि 13 दिनों में ही पाकिस्तानी सेना ने हथियार डाल दिए। पाकिस्तान के 90 हजार से भी ज्यादा सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। कहा जाता है कि ये अकेला युद्ध था जिसमें एक साथ इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों ने हथियार डाले। युद्ध में पाकिस्तान को जान-माल के साथ ही जमीन से भी हाथ धोना पड़ा और एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का जन्म हुआ।

भारतीय सेना की इस शौर्यगाथा का श्रेय जिस जनरल को जाता है वो हैं – सैम मानेकशॉ। सैम का जन्म 3 अप्रैल 1913 को अमृतसर में हुआ था। सैम के पिता डॉक्टर थे और सैम खुद भी डॉक्टर ही बनना चाहते थे। डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए वे इंग्लैंड जाना चाहते थे, पर पिता नहीं माने। इसके बाद उन्होंने पिता से नाराज होकर आर्मी भर्ती की परीक्षा दी। सैम के बारे में कई ऐसी बातें हैं, जो उनके मजबूत कैरेक्टर को सामने लाती हैं।

इंदिरा गांधी को ना कह दिया था
1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चाहती थीं कि अप्रैल में ही सेना पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश पर हमला कर दे, लेकिन सैम ने साफ इनकार कर दिया। सैम ने इंदिरा गांधी से कहा – क्या आप युद्ध हारना चाहती हैं? सैम के इस सवाल से इंदिरा दंग रह गईं। सैम ने इंदिरा से युद्ध की तैयारी के लिए समय मांगा। वक्त मिलने के बाद सैम ने सेना को प्रशिक्षित करने की तैयारियां शुरू कीं।

जब 7 गोलियों ने चीर दिया था शरीर
दूसरे विश्वयुद्ध के समय भारत अंग्रेजों का गुलाम था। उस समय भारतीय जवान ब्रिटिश सेना के लिए लड़ते थे। मानेकशॉ भी बर्मा में जापानी आर्मी के खिलाफ जंग के मैदान में थे। युद्ध के दौरान उनके शरीर में 7 गोलियां लगीं। उनके जिंदा बचने की उम्मीदें काफी कम थीं, लेकिन डॉक्टरों ने सारी गोलियां निकाल दीं और मानेकशॉ बच गए।

सैम मानेकशॉ को कई सम्मान प्राप्त हुए। 1973 में उन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि से नवाजा गया। वह इस पद से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय जनरल थे। 1972 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया। 1973 में सेना प्रमुख के पद से रिटायर होने के बाद वे वेलिंगटन चले गए। वेलिंगटन में ही साल 2008 में उनकी मृत्यु हो गई।

3 अप्रैल को देश-दुनिया में इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है –

  • 2016 में कोलकाता के ईडन गार्डंस मैदान पर वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड को हराकर आईसीसी टी-20 विश्व कप जीता।
  • 2010 में एपल ने अपना पहला आईपैड मार्केट में लॉन्च किया।
  • 1999 में भारत ने पहला वैश्विक दूरसंचार उपग्रह इनसैट 1 ई का प्रक्षेपण किया।
  • 1973 में मैनहट्टन की साइडवॉक से पहला पब्लिक मोबाइल टेलीफोन कॉल किया गया। मोटोरोला के मार्टिन कूपर ने बेल लैब्स के जोएल एंजेल को फोन लगाया।
  • 1949 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने उत्तरी अटलांटिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • 1942 में जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका पर आखिरी दौर की सैन्य कार्यवाई शुरू की।
  • 1933 में माउंट एवरेस्ट के ऊपर से पहली बार विमान ने उड़ान भरी थी।
  • 1922 में जोसेफ स्टालिन को सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति का महासचिव नियुक्त किया गया।
  • 1680 में मराठा सम्राज्य की नींव रखने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज का रायगढ में निधन।
  • 1325 में चिश्ती सम्प्रदाय के चौथे संत निज़ामुद्दीन औलिया का निधन।

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