कांग्रेस में कलह खत्म करने की कवायद: सोनिया कल से एक हफ्ते तक पार्टी नेताओं से मिलेंगी, शिकायतों और रणनीति पर चर्चा

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नई दिल्ली17 मिनट पहले

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अहमद पटेल के निधन के बाद एक पूर्व मुख्यमंत्री सोनिया से मिले थे। उन्होंने अंतरिम अध्यक्ष से पार्टी नेताओं से मुलाकात कर मुद्दे सुलझाने की अपील की थी। (फाइल फोटो)

बीते महीनों में कांग्रेस के अंदर ही विरोध के सुर उठे थे। अब मामले सुलझाने के लिए अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी आगे आई हैं। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कल (19 दिसंबर) से एक हफ्ते तक सोनिया कांग्रेस के कई नेताओं से मिलेंगी। इसमें उनकी शिकायतों के अलावा पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। पार्टी नेताओं के मुताबिक, मीटिंग में राज्य और केंद्रीय स्तर के नेताओं से चर्चा होगी। सोनिया उन नेताओं से भी मिलेंगी, जिन्होंने पार्टी में रिफॉर्म की बात कही थी।

बताया गया है कि अहमद पटेल के निधन के बाद एक पूर्व मुख्यमंत्री सोनिया से मिले थे। उन्होंने अंतरिम अध्यक्ष से पार्टी नेताओं से मुलाकात कर मुद्दे सुलझाने की अपील की थी। पहले बैच में जिन नेताओं से सोनिया मिल सकती हैं, उनमें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद समेत प्रदेश कांग्रेस समितियों के अध्यक्ष शामिल हैं।

‘हमारे लोगों ने जमीन से जुड़ाव खत्म किया’
एक महीने पहले गुलाम नबी आजाद ने पार्टी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि 5 स्टार कल्चर से चुनाव नहीं जीते जा सकते। आज नेताओं के साथ यह दिक्कत है कि अगर उन्हें टिकट मिल जाता है तो वे सबसे पहले 5 स्टार होटल बुक करते हैं। अगर सड़क खराब है तो वे उस पर नहीं जाएंगे। जब तक इस 5 स्टार कल्चर को छोड़ नहीं दिया जाता, तब तक कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता। पिछले 72 साल में कांग्रेस सबसे निचले पायदान पर है। कांग्रेस के पास पिछले दो कार्यकाल के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद भी नहीं है।

सोनिया को नेताओं ने चिट्ठी भी लिखी थी
कुछ महीने पहले पार्टी के 23 नेताओं ने इस मसले पर सोनिया गांधी को चिट्‌ठी भी लिखी थी। इनमें कपिल सिब्बल के साथ गुलाम नबी आजाद भी शामिल थे। चिट्ठी में पार्टी में ऊपर से नीचे तक बदलाव करने की मांग की गई थी।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में चिट्ठी लिखने वाले नेताओं की भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाए जाने से ये दोनों नाराज हो गए थे। बिहार चुनाव में हार के बाद कपिल सिब्बल ने तो यहां तक कह दिया था कि पार्टी ने शायद हर चुनाव में हार को ही नियति मान लिया है। इसे पार्टी के टॉप लीडरशिप यानी सोनिया और राहुल गांधी पर निशाना माना गया था।

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