कोरोना पर हाई लेवल मीटिंग: केंद्र ने राज्यों से कहा- टेस्टिंग और ट्रेसिंग बढ़ाएं, ऐसा न करने पर एक मरीज 30 दिन में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है

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नई दिल्ली6 घंटे पहले

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फोटो मुंबई के धारावी की है। यहां सोशल वर्कर कोरोना के खतरे को देखते हुए होली पर लोगों से सावधान रहने की अपील कर रहे हैं। - Dainik Bhaskar

फोटो मुंबई के धारावी की है। यहां सोशल वर्कर कोरोना के खतरे को देखते हुए होली पर लोगों से सावधान रहने की अपील कर रहे हैं।

पिछले दो हफ्ते में कोरोना के नए मामले तेजी से बढ़ने से परेशान केंद्र सरकार ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अफसरों के साथ शनिवार को हाई लेवल मीटिंग की। इसमें संक्रमण रोकने के लिए जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए गए। केंद्र ने सलाह दी है कि राज्य टेस्टिंग की संख्या बढाएं और यह तय करें कि लोग कोरोना की गाइडलाइंस के मुताबिक व्यवहार करें। अगर पाबंदियों पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो एक संक्रमित मरीज 30 दिन में एवरेज 406 लोगों में संक्रमण फैला सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में मई, 2020 के बाद अब एक हफ्ते में नए मामलों और मौतों में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई है। सबसे ज्यादा संक्रमण वाले 46 जिलों पर खास तौर से ध्यान दिए जाने की जरूरत है। इन जिलों का योगदान इस महीने आए कुल मामलों में 71% और मौतों में 69% है। महाराष्ट्र में कुल 36 जिलों में से 25 सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां पिछले एक हफ्ते के दौरान देश के 59.8% केस दर्ज किए गए हैं।

इन 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में बढ़े मामले
हेल्थ सेक्रेटरी राजेश भूषण ने 12 राज्यों और 46 जिलों के म्यूनिसिपल कमिश्नर और जिला कलेक्टरों के अलावा इनके चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी और सेक्रेटरी (हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर) के साथ रिव्यू मीटिंग की। यही राज्य और जिले कोरोना के बढ़ते मामलों और मौतों से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, पंजाब और बिहार शामिल हैं।

इन राज्यों को एक से डेढ़ महीनों के लिए लॉजिस्टिक और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट की एडवांस प्लानिंग करने के लिए भी कहा गया है, क्योंकि कम्युनिटी के बीच संक्रमण फैलने से लोकल एडमिनिस्ट्रेशन को नुकसान हो सकता है।

सिर्फ 44% लोग पहन रहे मास्क
मीटिंग में 12 राज्यों के सबसे प्रभावित जिलों का एक डेटा एनालिसिस पेश किया गया। इसके मुताबिक, कोरोना की लगभग 90% मौतें 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की हो रही है। स्टडी के मुताबिक, 90% लोग कोरोना से बचाव के लिए जागरूक हैं। हालांकि, महज 44% ही फेस मास्क पहन रहे हैं।

डेटा के हवाले से केंद्र ने यह भी कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर बताती है कि गाइडलाइंस के पालन और वायरस की रोकथाम के लिए बनाई मैनेजमेंट स्ट्रेटजी में सभी ने ढिलाई दिखाई है। इसलिए प्रभावित 46 जिलों में कम से कम 14 दिनों के लिए वायरस पर प्रभावी नियंत्रण और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग सहित सभी उपाय किए जाएं, ताकि ट्रांसमिशन की चेन को तोड़ा जा सके।

कोरोना को रोकने के लिए बताए 5 उपाय

  1. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोरोना टेस्ट में तेजी लाने के लिए कहा गया है। राज्यों को सलाह दी गई है कि सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में पॉजिटिविटी रेट के हिसाब से RT-PCR टेस्ट बढ़ाए जाने चाहिए। कुल टेस्ट में RT-PCR की हिस्सेदारी 70% से ज्यादा होना चाहिए। रैपिड एंटीजन टेस्ट को घनी आबादी वाले इलाकों में मामलों की पहचान करने के लिए स्क्रीनिंग टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए।
  2. केंद्र ने संक्रमितों के प्रभावी आइसोलेशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करने के लिए कहा है। टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जाए और उन्हें तुरंत आइसोलेट किया जाए। पहले भी यह सलाह दी गई थी कि पिछले 72 घंटे में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए 30 लोगों का पता लगाया जाए और उनका टेस्ट कर आइसोलेशन में भेजा जाए।
  3. हेल्थ मिनिस्ट्री ने कोरोना की रफ्तार रोकने के लिए सख्त उपाय अपनाने की जरूरत बताई। इसमें माइक्रो कंटेनमेंट जोन भी शामिल है। साथ ही सरकारी और निजी अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और हेल्थवर्कर को आराम देने की जरूरत पर भी जोर दिया।
  4. पंजाब और छत्तीसगढ़ में कर्नाटक और केरल के मुकाबले आबादी और आकार में छोटे होने के बावजूद ज्यादा मौतें हो रही हैं। केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मार्केट, इंटरस्टेट बस टर्मिनल, स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर कोरोना प्रोटोकाल का पालन कराने के लिए नए सिरे से ध्यान देने के लिए कहा है। इस पर राज्यों ने भारी जुर्माना लगाए जाने की सलाह दी।
  5. मिनिस्ट्री ने दोहराया कि वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। सभी जिलों में सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों में वैक्सीनेशन कैपिसिटी का बेहतर उपयोग करने और बफर स्टॉक करने के बजाए उपलब्ध वैक्सीन का इस्तेमाल करने की जरूरत है। चेन्नई, मुंबई, कोलकाता और करनाल के चारों डिपो में वैक्सीन का पर्याप्त बफर स्टॉक है। राज्यों की जरूरतों को उनके डेली वैक्सीनेशन और मौजूद स्टॉक के आधार पर पूरा किया जा रहा है।

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