कोरोना वैक्सीन बच्चों के लिए भी सेफ: फाइजर ने कहा- हमारी वैक्सीन 12 से 15 साल के बच्चों पर 100% कारगर, कोई साइड इफेक्ट भी नहीं

  • Hindi News
  • National
  • BioNTech Pfizer | Coronavirus Vaccine Effective And Phase 3 Trials On 12 15 Year Old Children

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

बर्लिनएक घंटा पहले

  • कॉपी लिंक

फोटो अमेरिका के सिनसिनाटी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर की है। यहां 12 साल के भारतीय मूल के अभिनव फाइजर वैक्सीन के ट्रायल में शामिल हुए।

कोरोना वैक्सीन बना रहीं फार्मा कंपनियों फाइजर-बायोएनटेक ने दावा किया है कि उनकी वैक्सीन 12 से 15 साल के बच्चों पर 100% इफेक्टिव है। CNN के मुताबिक, कंपनी ने बुधवार को एक बयान में कहा है कि अमेरिका में 2,250 बच्चों पर किए गए फेज थ्री ट्रायल्स में यह 100% असरदार रही। दूसरा डोज देने के एक महीने बाद उनमें बेहतर एंटीबॉडी रिस्पॉन्स देखने को मिला। कंपनी इस डेटा को US फूड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन को सौंपने पर विचार कर रही है, ताकि जल्द से जल्द वैक्सीन को इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिल सके।

भारतीय मूल के अभिनव भी ट्रायल में शामिल हुए
वैक्सीन के ट्रायल अक्टूबर 2020 से जारी थे। इसके नतीजे अब आए हैं। भारतीय मूल के 12 साल के अभिनव भी फाइजर वैक्सीन के ट्रायल में शामिल हुए। वे कोरोना वैक्सीन लेने वाले सबसे कम उम्र के बच्चों में शामिल है। उनके पिता शरत भी डॉक्टर हैं और कोविड वैक्सीन के ट्रायल में शामिल रहे हैं। अभिनव ने अमेरिका के सिनसिनाटी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर में वैक्सीन लगवाई थी।

अभिनव ने अमेरिका के सिनसिनाटी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर में वैक्सीन लगवाई थी।

अभिनव ने अमेरिका के सिनसिनाटी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर में वैक्सीन लगवाई थी।

2 से 5 साल के बच्चों पर ट्रायल शुरू करने की योजना
कंपनी ने पिछले सप्ताह ही 6 महीने से 11 साल तक के बच्चों में वैक्सीन के फेज 1,2,3 के क्लिनिकल ट्रायल की स्टडी शुरू की है। इसी दौरान 5 से 11 साल के बच्चों को पहला डोज दिया गया। कंपनी अगले सप्ताह से 2 से 5 साल के बच्चों पर ट्रायल शुरू करने की योजना बना रही है। कंपनी का प्लान इसमें 4,644 बच्चों को शामिल करने का है। इसके नतीजे 2021 के आखिर तक आने की उम्मीद है।

एक और कंपनी मॉडर्ना भी टीनएजर और बच्चों पर अपनी वैक्सीन का ट्रायल कर रही है। इनमें 12 से 17 साल और 6 महीने से 11 साल तक के बच्चों पर अलग-अलग ट्रायल किए जा रहे हैं।

म्यूटेशन से बच्चों को नुकसान का खतरा
एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई है कि कोरोना वायरस आगे भी फैलता रहेगा और यह ज्यादा खतरनाक रूप में म्यूटेट यानी बदलता रहेगा। ऐसा कोई एक या एक से ज्यादा म्यूटेशन बच्चों को भी नुकसान पहुंचाने वाले हो सकते हैं।

अमेरिका में ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल के डिपार्टमेंट ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन के डॉक्टर जेरेमी सैमुअल फॉस्ट और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ साइंस के वायरोलॉजिस्ट डॉ. एंजेला रासमुसेन का कहना है कि बच्चों में कोरोना के गंभीर मामलों की संख्या बेहद कम होने के बावजूद उन्हें तेजी से वैक्सीन देने की जरूरत है।

हर्ड इम्यूनिटी के लिए बच्चों को वैक्सीन लगना जरूरी
संक्रामक बीमारियों के जाने-माने अमेरिकी विशेषज्ञ डॉ. एंथोनी फौसी समेत कई विशेषज्ञों का कहना है कि हर्ड इम्यूनिटी को हासिल करने के लिए बच्चों का वैक्सीनेशन जरूरी है। कोरोना वैक्सीन बच्चों के लिए सुरक्षित हैं, इसकी जांच के लिए क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं, लेकिन हमें इस बात के लिए तैयार रहना होगा कि इन ट्रायल्स से कोई ब्लॉकबस्टर नतीजे सामने आने वाले नहीं।

खबरें और भी हैं…

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *