खरीदारों को लुभाने में मदद मिलेगी: सरकारी बैंक को अभी फाइनेंशियल कंपनियों में स्टेक बेचने से परहेज, उनको है प्राइवेटाइजेशन वाली लिस्ट आने का इंतजार

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4 घंटे पहले

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  • सेंट्रल बैंक ने अपनी होम फाइनेंस यूनिट बेचने की डील पूरी नहीं की, तय की गई थी 31 मार्च 2021 की समय-सीमा
  • लाइफ इंश्योरेंस यूनिट स्टार यूनियन दाइची में स्टेक बेचने की कोशिश में लगे बैंक ऑफ इंडिया के थमे हुए हैं कदम
  • बैंकों का मानना है कि प्राइवेट इनवेस्टर उनको ज्यादा वैल्यू देते हैं, जिनके पास फैलाने लायक दूसरे बिजनेस भी होते हैं

जो सरकारी बैंक कंसॉलिडेशन स्कीम का हिस्सा नहीं थे, वे पूंजी जुटाने की योजना को अंजाम देने के लिए अपनी संपत्तियों को बेचने में सुस्ती दिखा रहे हैं। इन बैंकों ने स्टेक सेल करने से पहले इस बात का इंतजार करने का फैसला किया है कि कहीं वे भी सरकार के प्राइवेटाइजेशन प्लान का हिस्सा तो नहीं। उनका मानना है कि प्राइवेट इनवेस्टर उन बैंकों को ज्यादा वैल्यू देते हैं, जिनके पास फैलाने लायक दूसरे बिजनेस भी होते हैं।

सेंट्रल बैंक ने होम फाइनेंस यूनिट बेचने की डील पूरी करने में नहीं दिखाई दिलचस्पी

मिसाल के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को अपनी हाउसिंग फाइनेंस यूनिट सेंट बैंक होम फाइनेंस को बेचने के लिए ट्रांजैक्शन को 31 मार्च 2021 की समय सीमा के भीतर पूरा करना था लेकिन उसने यह मौका जाने दिया। अगर यह डील परवान चढ़ती तो उससे इस सरकारी को 160 करोड़ रुपए हासिल होते। इसी तरह, बैंक ऑफ इंडिया अरसे से लाइफ इंश्योरेंस यूनिट स्टार यूनियन दाइची में अपनी हिस्सेदारी बेचने की संभावना तलाश रहा है।

गौरतलब है कि कमोबेश सभी सरकारी बैंकों ने अपने अच्छे वक्त में फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियों में निवेश किए थे। लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अब बैंकों को सब्सिडियरी बनाने की इजाजत देने में अनिच्छा दिखा रहा है।

नीति आयोग ने कंसॉलिडेशन प्रोग्राम का हिस्सा रहे बैंकों को प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम से बाहर रखा

फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बजट में कहा था कि सरकार वित्त वर्ष 2021-22 में दो पब्लिक सेक्टर बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी को प्राइवेटाइज करेगी। नीति आयोग ने प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम से उन पांच पब्लिक सेक्टर बैंकों को बाहर रखने का फैसला किया है जो सरकार के कंसॉलिडेशन प्रोग्राम का हिस्सा थे। इस हिसाब से बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक, यूनियन बैंक और इंडियन बैंक सरकार के प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम से बाहर रहेंगे।

पब्लिक सेक्टर बैंकों का विलय तो पूरा हुआ, लेकिन अभी तक हासिल नहीं हुआ मकसद

कंसॉलिडेशन प्रोग्राम का हिस्सा रहे पब्लिक सेक्टर बैंकों को प्राइवेटाजेशन प्रोग्राम से बाहर रखने की वजह यह है कि उनका विलय तो पूरा हो गया है, लेकिन उनके कंसॉलिडेशन का मकसद अभी तक हासिल नहीं हुआ है। विलय को लेकर उम्मीद की गई थी कि शुरुआत में बैंकों का खर्च वाजिब लेवल पर आएगा और बाद के वर्षों में बैंकों को इकोनॉमी ऑफ स्केल और ग्रोथ के जरिए ज्यादा वैल्यू हासिल होगी।

कंसॉलिडेशन प्रोग्राम से बाहर थे BoI, BoM, IOB, सेंट्रल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और यूको बैंक

सरकार के कंसॉलिडेशन प्रोग्राम से बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब एंड सिंध बैंक और यूको बैंक को बाहर रखा गया था। देश की सबसे बड़ी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी LIC के निवेश के बाद IDBI बैंक को प्राइवेट बैंक का दर्जा दिया गया है। सरकार ने कहा है कि पब्लिक सेक्टर बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के बाद भी उनके एंप्लॉयी के हितों की रक्षा की जाएगी। उनके सभी अधिकारों को बनाए रखा जाएगा और उनके वेतन भत्तों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

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