जीवनचर्या: छोटे-छोटे राज़ का न लें तनाव, ऐसे रखें ख़ुद को इन आदतों से दूर

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शिखर चंद जैन2 घंटे पहले

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  • छोटी-छोटी बातों के राज़ बड़े तनाव दे सकते हैं। इन्हें जानना अगर किसी तरह का नाज़ करवाता हो, तो ध्यान रखिए कि इनको छुपाए रखना सेहत को बहुत नुक़सान पहुंचा सकता है।

कुछ लोगों में अजीब-सी आदत होती है। वे बेहद सामान्य-सी सर्वज्ञात बात या फिर ना छिपाने जैसी होने के बावजूद किसी बात को इस तरह ट्रीट करते हैं मानो सिर्फ उन्हें ही इस गूढ़ रहस्य की जानकारी हो। भरी सभा में या लोगों की महफ़िल के बीच वे अपनी नज़दीक बैठे व्यक्ति से छोटी से छोटी बात भी इस तरह शेयर करते हैं मानो दूसरा सुन लेगा तो आफ़त आ जाएगी। ऐसी कानाफूसी वाली प्रवृत्ति के लोगों को सचमुच कोई गुप्त या रहस्य की बात बता दी जाए तो उनका दिमाग़ बुरी तरह उलझ जाता है और वे तनाव का शिकार हो जाते हैं।

ज़िंदगी को सरल रखें

ज़िंदगी को जितना आसान रखा जाए उतना ही अच्छा है क्योंकि वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन बातों को आप किसी से शेयर नहीं कर सकते, वे आपको परेशान कर सकती हैं। आपकी ज़िंदगी में जितने ज़्यादा राज़ होंगे आपका तनाव उतना ही ज़्यादा होगा। बहुत कम लोगों की मानसिक क्षमता इतनी मज़बूत होती है कि वे बड़े राज़ भी आसानी से खुद में जज़्ब कर सकें ।

न ढोएं कोई बोझ

समाजशास्त्री प्रीति सुराणा कहती हैं कि आप वाक़ई कोई ऐसी गुप्त बात जानती हैं और हर किसी को बता नहीं सकतीं तो कंसल्टेंट को ही बताकर बोझ से मुक्त हो लें। इससे आप नकारात्मक भा‌वों से उबर पाएंगी। वैसे भी कोई राज़ हमेशा के लिए राज़ रह नहीं सकता।

हर बात को न समझें सीक्रेट

मनोविज्ञानी प्रदीप सिंह शक्तावत कहते हैं कि आप को छोटी-छोटी बातों को सीक्रेट समझने का भ्रम नहीं पालना चाहिए। ना ही अनावश्यक राज़ अपने दिमाग़ में ढोने चाहिए। बेहतर होगा कि आप किसी राज़ जैसी उलझन में ना फंसकर अपनी सामान्य दिनचर्या, करियर, बिज़नेस और पर्सनल लाइफ़ पर अपना ध्यान केंद्रित करें। मनोविज्ञान पर हुए एक शोध में कहा गया है कि राज़ छिपाना ख़ुशहाली और सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। किसी राज़ का बोझ इंसान को न सिर्फ मानसिक रूप से थका देता है बल्कि सबसे अलग होने और अकेलेपन का दर्द भी देता है।

एकाग्रता से दूरी

कोलंबिया और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं स्लेपियन, हालवी और गैलिनस्की ने अपने अध्ययन के बाद बताया है कि सीक्रेट अक्सर परेशान करते हैं। जितनी परेशानी राज़ जानने से नहीं होती उससे ज्यादा उस व्यक्ति के सामने रहने पर होती है जिससे आपको उसे छिपाना है। इससे दिमाग़ में एक अजीब-सी उथल-पुथल मच जाती है जो तनाव का सबब बन जाती है। 13,000 लोगों पर किए गए एक अध्ययन में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि लोग सीक्रेट के कारण अपने मूल काम पर एकाग्र नहीं हो पाते और हमेशा एक अजीब-सी उलझन और बोझ से दबे रहते हैं। यह बोझ उनके दिल का अमन और दिमाग़ का चैन छीन लेता है ।

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