डिजिटल-सोशल मीडिया पर सख्ती: कंटेंट महिलाओं के खिलाफ हुआ तो 24 घंटे में हटाना होगा, गंभीर मामलों में यह भी बताना होगा कि खुराफात सबसे पहले किसने की

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नई दिल्ली8 घंटे पहले

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केंद्र सरकार ने गुरुवार को सोशल मीडिया, OTT प्लेटफॉर्म और डिजिटल न्यूज के लिए गाइडलाइन जारी की। सरकार ने कहा कि आलोचना और सवाल उठाने की आजादी है, पर सोशल मीडिया के करोड़ों यूजर्स की शिकायत निपटाने के लिए भी एक फोरम होना चाहिए। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया पर अगर किसी की गरिमा (खासतौर महिलाओं से जुड़े मामले) को ठेस पहुंचाने वाले कंटेंट की शिकायत मिलती है तो 24 घंटे में इसे हटाना होगा। वहीं, देश की सुरक्षा जैसे मामलों से जुड़ी जानकारी शेयर करने पर फर्स्ट ओरिजिन भी बताना होगा।

वहीं सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने OTT और डिजिटल न्यूज पोर्टल्स के बारे में कहा कि उन्हें खुद को नियंत्रित करने की व्यवस्था बनानी चाहिए। जिस तरह फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड है, वैसी ही व्यवस्था OTT के लिए हो। इस पर दिखाया जाने वाला कंटेंट उम्र के हिसाब से होना चाहिए।

‘हिंसा फैलाने वालों को प्रमोट करने का प्लेटफॉर्म बना सोशल मीडिया’
रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘हमें शिकायत मिली थी कि सोशल मीडिया क्रिमिनल, आतंकवादी और हिंसा फैलाने वालों को प्रमोट करने का प्लेटफॉर्म बन गया है। भारत में वॉट्सऐप के यूजर्स 50 करोड़ हैं। फेसबुक के 41 करोड़ यूजर्स हैं, इंस्टाग्राम यूजर्स की संख्या 21 करोड़ और ट्विटर के 1.5 करोड़ यूजर्स हैं। इन सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के गलत इस्तेमाल और इनके जरिए फेक न्यूज फैलाने की शिकायतें आई हैं। ये चिंताजनक बात थी, इसलिए सरकार ने ऐसे प्लेटफार्म्स के लिए गाइडलाइन तैयार करने का फैसला लिया।’

सोशल मीडिया के लिए गाइडलाइंस

  • सोशल मीडिया समेत बाकी इंटरमीडियरीज को अपने यूजर्स खासकर महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखना होगा। किसी की प्राइवेसी खत्म करने वाला कंटेंट, उसका पूरा शरीर या कुछ हिस्सा न्यूड दिखाने वाला या सेक्सुअल एक्टिविटी करते हुए या उसकी तस्वीरों से छेड़छाड़ (मॉर्फ्ड इमेज) वाला कंटेंट शिकायत मिलने के 24 घंटे में हटाना पड़ेगा। इसकी शिकायत खुद इंडिविजुअल या फिर उसकी तरफ से कोई और भी कर सकता है।
  • सोशल मीडिया यूजर्स करोड़ों की तादाद में हैं। सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर इन यूजर्स को अपनी शिकायत के निपटारे के लिए एक फोरम मिले।अगर कोई अदालत या सरकारी संस्था किसी आपत्तिजनक, शरारती ट्वीट या मैसेज के फर्स्ट ओरिजिनेटर की जानकारी मांगती है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ये जानकारी देनी होगी।
  • ये व्यवस्था भारत की अखंडता, एकता और सुरक्षा से जुड़े मामलों, सामाजिक व्यवस्था, दूसरे देशों से रिश्तों, रेप और यौन शोषण जैसे मामलों में लागू होगी।
  • हम बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स के आंकड़े बताएंगे। इन प्लेटफॉर्म को शिकायतों के निपटारे के लिए मैकेनिज्म बनाना होगा। एक अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी और इसका नाम भी बताना होगा।
  • इस अधिकारी को 24 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज करनी होगी और इसका निपटारा 15 दिन के भीतर करना होगा।
  • यूजर के सम्मान खासतौर पर महिलाओं के सिलसिले में, अगर किसी की आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट की जाती है तो शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर कंटेंट हटाना होगा।
  • इन कंपनियों को हर महीने एक रिपोर्ट देनी होगी कि कितनी शिकायतें आईं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।
  • अगर किसी सोशल मीडिया यूजर के कंटेंट को हटाना है तो उसे ऐसा करने की वजह बतानी होगी और उनका पक्ष भी सुनना होगा।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में यूजर के रजिस्ट्रेशन के लिए वॉलेंटरी वेरिफिकेशन मैकेनिज्म होना चाहिए।

OTT और डिजिटल न्यूज के लिए गाइडलाइन

  • OTT और डिजिटल न्यूज के लिए 3 फेज का मैकेनिज्म होगा। इन सभी को अपनी जानकारियां देनी होंगी। रजिस्ट्रेशन की बाध्यता नहीं है, लेकिन जानकारी जरूर देनी होगी।
  • शिकायतों के निपटारे के लिए सिस्टम बनाया जाए। इन्हें सेल्फ रेगुलेशन बॉडी बनानी होगी। इसे सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज या फिर इसी कद का कोई व्यक्ति लीड करेगा।
  • अगर किसी मामले में तुरंत एक्शन लिए जाने की जरूरत है, तो इसके लिए सरकार के स्तर पर एक व्यवस्था बनाई जाएगी, जो इस तरह के मामलों को देख सके।
  • फिल्मों की तरह ही OTT प्लेटफॉर्म को भी प्रोग्राम कोड फॉलो करना होगा। कंटेंट के बारे में उम्र के लिहाज से क्लासिफिकेशन करना होगा यानी कौन सा कंटेंट किस एज ग्रुप के लिहाज से सही है।
  • OTT प्लेटफॉर्म्स को 5 कैटेगरी में अपने कंटेंट को क्लासिफाई करना होगा। U (यूनिवर्सल), U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+ और A यानी एडल्ट।
  • U/A 13+ और इससे ऊपर की कैटेगरी के लिए पैरेंटल लॉक की सुविधा देनी होगी ताकि वे बच्चों को इस तरह के कंटेंट से दूर रख सकें।

नोटिफिकेशन जारी होते ही गाइडलाइन प्रभावी

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज जो भी गाइडलाइन जारी की गई हैं, वे सभी नोटिफिकेशन जारी होते ही लागू हो जाएंगी।

इन गाइडलाइंस के लिए 3 महीने का वक्त

  • सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज के लिए ये गाइडलाइन 3 महीने बाद लागू होंगी ताकि वे अपने मैकेनिज्म को सुधार सकें।
  • नियमों और कानूनों का पालन करवाने के लिए भारत में चीफ कॉम्पिलियांस नोडल अफसर, सरकारी एजेंसियों से 24 घंटे संपर्क में रहने वाले नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन, शिकायतों के निपटारे के लिए रेसिडेंट ग्रेवांस ऑफिसर की नियुक्ति करनी होगी। ये सभी अफसर भारत में ही रहेंगे।
  • किसी पोस्ट या मैसेज के ओरिजिनेटिंग सोर्स की पहचान बतानी होगी ताकि रोकथाम, जांच और सजा जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें। ये व्यवस्था भारत की एकता-अखंडता, सामाजिक व्यवस्था, रेप, यौन शोषण और बाल शोषण जैसे मामलों में लागू होगी।
  • वॉलेंटरी वेरिफिकेशन मैकेनिज्म, पोस्ट हटाने की वजह बतानी होगी और यूजर की बात सुननी होगी।
  • कोर्ट या सरकारी एजेंसी के मुताबिक अगर कोई जानकारी गैरकानूनी है या भारत की एकता-अखंडता, सामाजिक व्यवस्था, दूसरे देशों से रिश्तों से जुड़े कानून के तहत बैन है तो इसे हटाना होगा।

कैपिटल हिल्स और लाल किले का जिक्र भी आया
रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘सोशल मीडिया का देश में स्वागत है। वो यहां आएं बिजनेस करें, पैसा कमाएं, भारतीयों को मजबूत करें। हां, भारत की एकता और अखंडता का ध्यान रखना होगा। सोशल मीडिया में डबल स्टैंडर्ड नहीं होना चाहिए। अगर अमेरिका में कैपिटल हिल्स पर अटैक होता है तो आप पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करते हैं। अगर भारत में लाल किले पर हिंसक घटना होती है तो आप डबल स्टैंडर्ड अपनाते हैं। ये साफतौर पर हमें मंजूर नहीं है।’

दो बार सेल्फ रेगुलेशन का मौका दिया, नहीं हुआ तो गाइडलाइन बनाईं
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘डिजिटल मीडिया और न्यूज पोर्टल की तरह करोड़ों लोग OTT प्लेटफॉर्म पर आ गए हैं। जो प्रेस से आते हैं, उन्हें प्रेस काउंसिल का कोड फॉलो करना होता है, पर डिजिटल मीडिया के लिए बंधन नहीं है। टीवी वाले केबल नेटवर्क एक्ट के तहत कोड फॉलो करते हैं, पर OTT प्लेटफॉर्म के लिए ऐसा नियम नहीं है। सरकार ने सोचा है कि सभी मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए एक ही न्यायिक व्यवस्था हो। कुछ नियमों का पालन सभी को करना होगा और व्यवस्था बनानी होगी।’

‘इसके लिए दोनों सदनों में OTT पर 50 सवाल पूछे गए। इसके बाद हमने दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में OTT से जुड़े सभी लोगों की मीटिंग बुलाई। हमने उन्हें सेल्फ रेगुलेशन की बात कही थी, पर यह नहीं हुआ। दूसरी मीटिंग में हमने 100 दिन के भीतर व्यवस्था बनाने की बात कही, फिर भी नहीं हुआ। इसके बाद हमने सभी मीडिया के लिए इंस्टिट्यूशनल सिस्टम तैयार करने की सोची। मीडिया की आजादी लोकतंत्र की आत्मा है। पर, हर आजादी जिम्मेदारी भरी होनी चाहिए।’

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