नए मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क का मुद्दा: रघुराम राजन ने कहा इन्फ्लेशन टार्गेट में ज्यादा बदलाव करने से भरभरा सकता है बांड बाजार

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नई दिल्ली11 घंटे पहले

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प्रख्यात अर्थशास्त्री ने यह भी कहा कि 2024-25 तक देश को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो टार्गेट सेट किया गया है वह कोरोना महामारी से पहले भी चाहत पर ज्यादा और सोची-विचारी गणना पर कम आधारित था

  • RBI के पूर्व गवर्ननर ने कहा मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क में ज्यादा बदलाव के लिए यह उचित समय नहीं
  • अभी जो मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क है उससे महंगाई को कम करने और विकास को तेज करने में मदद मिली है

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने रविवार को चेतावनी दी कि भारत की मौद्रिक नीति के वर्तमान फ्रेमवर्क में ज्यादा बदलाव करने से बांड मार्केट भरभरा सकता है। अभी जो मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क (मीडियम टर्म इन्फ्लेशन टार्गेट) है उससे महंगाई को कम करने और विकास को तेज करने में मदद मिली है। प्रख्यात अर्थशास्त्री ने यह भी कहा कि 2024-25 तक देश को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो टार्गेट सेट किया गया है उसमें कोरोना महामारी से पहले भी चाहत ज्यादा दिखती थी और वह सोची-विचारी गणना को कम आधारित था।

राजन ने कहा कि मेरा मानना है कि मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क से महंगाई कम करने में मदद मिली है। यह RBI का आर्थिक तेजी लाने की भी थोड़ी ताकत देता है। यदि यह फ्रेमवर्क नहीं होता, तो इतना बड़ा वित्तीय घाटा होने पर क्या होता, यह सोच पाना कठिन है। राजन से यह पूछा गया था कि क्या वह मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क के तहत महंगाई के 2-6 पर्सेंट के टार्गेट बैंड में बदलाव किए जाने के पक्ष में हैं।

मौजूदा फ्रेमवर्क के तहत RBI महंगाई दर को औसत 4% बनाए रखने की कोशिश करता है

मौजूदा मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क के तहत सरकार ने RBI को खुदरा महंगाई दर को औसत 4% पर बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है। इसमें 2% घट-बढ़ की गुंजाइश रखी गई है। इसी टार्गेट को ध्यान में रखकर RBI की 6 सदस्यों वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) मुख्य ब्याज दर तय करती है। MPC की अध्यक्षता RBI के गवर्नर करते हैं।

31 मार्च तक लागू है मौजूदा मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क

मौजूदा मीडियम टर्म इन्फ्लेशन टार्गेट को अगस्त 2016 में नोटिफाई किया गया था। यह 31 मार्च को समाप्त हो रहा है। अगले 5 साल के लिए नए इन्फ्लेशन टार्गेट पर विचार किया जा रहा है। इसी महीने नए टार्गेट को नोटिफाई किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखकर राजन ने कहा कि यदि फ्रेमवर्क में ज्यादा बदलाव किया गया ता बांड मार्केट के भरभरा जाने का जोखिम पैदा होगा।

मौजूदा फ्रेमवर्क विकास दर घटने के लिए जिम्मेदार नहीं

उन्होंने कहा कि महंगाई को कम करने के लिहाज से यह लाभदायक है। मुझे नहीं लगता कि विकास दर गिरने के लिए यह जिम्मेदार है। इस फ्रेमवर्क में बड़े बदलाव करने के लिए अभी सही समय नहीं चल रहा है।

विकास दर तेज करने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर कर्ज ले रही है

कोरोना महमारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था की विकास दर तेज करने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर कर्ज ले रही है। इसका बुरा असर देश की वित्तीय सेहत पर पड़ेगा। बांड का यील्ड भी बढ़ रहा है। बांड का यील्ड बढ़ने के कारण सरकार को लिए जाने वाले कर्ज पर ज्यादा ब्याज चुकाना होगा। सुधार के मुद्दे पर राजन ने कहा कि 2021-22 के बजट में निजीकरण पर काफी जोर दिया गया है। पहले इस दिशा में सरकार को ज्यादा सफलता नहीं मिली है और इस बार इस दिशा में ज्यादा सफलता कैसे मिलेगी, यह सवाल पैदा होता है।

महंगाई बांड के लिए सबसे बड़ा जोखिम

इन्वेस्टोपीडिया के मुताबिक महंगाई बांड के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। महंगाई से बांड का पर्चेजिंग पावर घट जाता है यानी, बांड का वास्तविक फेस वैल्यू घटता जाता है। इसकी भरपाई करने के लिए निवेशक ज्यादा यील्ड की मांग करते हैं। इसका मतलब यह है कि वे बांड को फेस वैल्यू से कम कीमत पर खरीदते हैं। महंगाई या महंगाई की आशंका जितनी बढ़ेगी, बांड का वैल्यू उतना ही घटता जाएगा।

इन्फ्लेशन टार्गेट बढ़ने का इस तरह पड़ेगा असर

यदि विकास दर तेज करने के लिए सरकार RBI के लिए मीडियम टर्म इन्फ्लेशन टार्गेट बढ़ाती है, तो महंगाई दर बढ़ेगी और इससे बांड का वैल्यू गिर जाएगा। उदाहरण के लिए RBI यदि मौजूदा फ्रेमवर्क में 4% खुदरा महंगाई दर बनाए रखनी की कोशिश करता है, तो नए फ्रेमवर्क के तहत वह खुदरा महंगाई दर को 5% या उससे ज्यादा बनाए रखने की कोशिश करेगा। इससे महंगाई बढ़ेगी और बांड का यील्ड बढ़ेगा। इसका मतलब यह हुआ कि इसी अनुपात में बांड का वैल्यू घट जाएगा।

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