पाकिस्तान में आतंकियों के खत्म होने का असर: स्वात में 100 से ज्यादा मठ और मंदिर पुराने वैभव में लौट रहे हैं, 11 साल बाद पर्यटक आने शुरू

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13 मिनट पहले

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1300 वर्ष पुराने मंदिर को संरक्षित करती टीम।

  • आतंक से मुक्ति के बाद पाक में स्थित बुद्ध की स्वात वैली मुस्कुरा रही है

पाकिस्तान की स्वात घाटी। इस घाटी का नाम सुनते ही जेहन में सबसे पहले आतंकवाद, चरमपंथ और तालिबान जैसे शब्द आते हैं। लेकिन अब यहां शांति है। 11 साल बाद इस वैली में पर्यटकों की आहट सुनाई दे रही है। इटली से आए पुरातत्वविदों की टीम ने डायनामाइट से उड़ाई बुद्ध की प्रतिमा को मूल रूप दे दिया है।

इटली सरकार ने इस घाटी को संरक्षित करने के लिए 20 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। जहानाबाद से 20 किमी दूर मिंगोरा शहर में सातवीं सदी में पहाड़ काटकर बनाई गई बुद्ध की प्रतिमा सहनशीलता का ताकतवर चेहरा है। प्रोफेसर परवेश शाहीन कहते हैं, ‘बुद्ध यहां कि पहाड़ियों पर पूजा करने आते थे।

जब वे चले गए तो चट्टान में उनकी प्रतिमा को प्रतिष्ठित किया गया। ध्यान की मुद्रा में बुद्ध की यह प्रतिमा दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी है। बंटवारे से पहले तक हिमालयी इलाकों से बौद्ध संन्यासी यहां आकर ध्यान लगाया करते थे। अब हम सब चाहते हैं कि दुनियाभर से श्रद्धालु यहां आकर बुद्ध को महससू करें।’

2007 में हुआ था आतंकी हमला
सितंबर 2007 में आतंकियों ने इसे डायनामाइट से उड़ा दिया था। इस घटना के चश्मदीद रहे अख्तर अली उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, ‘आतंकियों ने बुद्ध के चेहरे तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों और रस्सी का इस्तेमाल किया। बुद्ध के चेहरे में ड्रिल किया, उसमें बारूद और डायनामइट भरा और फिर धमाका कर दिया।

11 साल बाद भी लोगों को लौटना जारी
​​​​​​​वे कहते हैं कि आतंक की वजह से 15 लाख लोगों को इलाका छोड़ना पड़ा था। अब 11 साल बाद भी लोगों को लौटना जारी है। स्वात घाटी को दुनिया में गांधार सभ्यता के महान केंद्रों में से एक माना जाता है, जिसमें बुद्ध की दर्जनों मूर्तियां और ऐतिहासिक मंदिरों के अवशेष हैं। यहां 1000 से ज्यादा मठ, गर्भगृह और स्तूप घाटी में फैले हुए थे।

खुदाई कर बौद्ध मठों और मंदिरों को संरक्षित कर रहे​​​​​​​
स्वात वैली के क्यूरेटर एफ रहमान कहते हैं, सरकार ने पुरातत्व के नजरिए से कई महत्वपूर्ण संपत्ति खरीदी हैं। हम यहां खुदाई कर बौद्ध मठों और मंदिरों को संरक्षित कर रहे हैं। यहां बारिकोट घुंडई में खुदाई के दौरान भगवान विष्णु का 1300 साल पुराने मंदिर का अवशेष मिला है। पास ही सेना की छावनी और पानी का टैंक भी मिला है। संभावना है कि दर्शन से पहले भक्त और पुजारी यहां स्नान करते थे। इसके अलावा हम बारिकोट स्वात में 1800 साल पुराने बौद्ध परिसर में खुदाई कर रहे हैं।

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