भास्कर एक्सक्लूसिव: कोरोना के चलते 20 दिन में अमोल गुप्ते का 7 किलो वजन घटा, इंटरव्यू में बताया श्रद्धा कपूर ने क्यों छोड़ दी थी उनकी फिल्म ‘साइना’

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2 घंटे पहलेलेखक: ज्योति शर्मा

बैडमिंटन प्लेयर साइना नेहवाल की बायोपिक ‘साइना’ बीते शुक्रवार सिनेमाघरों में रिलीज हुई। परिणीति चोपड़ा स्टारर इस फिल्म को अमोल गुप्ते ने निर्देशित किया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में गुप्ते ने फिल्म और पर्सनल लाइफ से जुड़ी कई बातें साझा कीं। इस दौरान उन्होंने एक्टर और एक्ट्रेस की फिल्मों के बजट में होने वाले अंतर को गलत बताया। उन्होंने कहा कि जब फिल्म बेटी या हीरोइन पर होती है तो उसका बजट छोटा हो जाता है। उनके मुताबिक, यह गलत है, लेकिन सच्चाई यही है। पेश हैं अमोल गुप्ते से हुई बातचीत के अंश:

Q. आपकी तबियत खराब थी, अब कैसे हैं आप ?
A.
जी हां ! कोरोना हो गया था। लेकिन अब ठीक हूं। कोरोना के चलते 20 दिनों में 7 किलो वजन कम हो गया है। फिलहाल अच्छा महसूस कर रहा हूं।

Q. साइना की कहानी पर कब से काम करना शुरू किया ?
A.
2015 में जब साइना नेहवाल वर्ल्ड चैंपियन बनीं, तब मुझे लगा कि इस हुनरमंद बेटी पर फिल्म बनानी चाहिए। ताकि वह इंस्पिरेशन हो। भारतीय परिवारों में यह बात फैल जाए कि जिस बेटी को इस दुनिया में लाए हो, उसे गर्व से पालो-पोसो और बड़ा करो। उसे साइना की तरह उछाल दो, ताकि वह भी वर्ल्ड में नंबर वन बने।

Q. साइना नेहवाल को फिल्म के लिए कैसे राजी किया?
A.
मैं उनके पास नहीं गया था। मेरे एक दोस्त के पास पहले से ही साइना पर फिल्म बनाने के राइट्स थे। उन्होंने साइना और उनके परिवार को बताया कि अमोल गुप्ते आपके जीवन पर आधारित फिल्म बनाएंगे। इसलिए वे पहले से जान चुके थे। जब उनसे हैदराबाद मिलने पहुंचा तो वे बहुत खुश थे, क्योंकि वे जानते थे कि मैं बाजार में खड़ा हूं। सभी मेरे काम से वाकिफ थे। साइना मेरी फिल्मों के बारे में जानती थीं। वे इस बात को लेकर सुनिश्चित थीं कि उनके जीवन की कहानी सही हाथों में है।

Q. श्रद्धा के फिल्म को छोड़ने की क्या वजह थी?
A.
पहली बात तो यह कि हमारे बीच कोई मनमुटाव नहीं था। दूसरी बात यह कि वे शूट के लिए पूरी तरह रेडी थीं, लेकिन उन्हें डेंगू हो गया। डेढ़ महीने तक डेंगू से जूझने के चलते श्रद्धा पूरी तरह कमजोर हो गई थीं। उनका अगर कोई ड्रामेटिक सीन होता, या कोई दूसरी फिल्म होती तो अलग बात होती, लेकिन यह तो बैटमिंटन वाली फिल्म है। उनसे 12 घंटे बैटमिंटन कोर्ट में खड़े रहना कैसे हो पाता? उसके बाद उन्होंने ‘छिछोरे’ और फिर ‘स्ट्रीट डांसर’ की। ‘स्ट्रीट डांसर’ में भूषण कुमार ही प्रोड्यूसर थे और उस वक्त उन्हें एक अच्छी हीरोइन की जरूरत थी, क्योंकि बड़ी फिल्म थी और बहुत पैसे लग चुके थे। श्रद्धा ने ‘स्ट्रीट डांसर’ की और फिर भूषण जी ‘साइना’ के लिए परिणीति को ले आए। सब खुश थे, क्योंकि कोई प्रॉब्लम थी ही नहीं। मैंने दुनिया देखी है, तो जब भी क्राइसिस की सिचुएशन आती है, मैं अगले दिन सूरज उगने का इंतजार करता हूं।

Q. सपोर्ट्सपर्सन बनाने के लिए परिणीति के हावभाव पर कितना काम किया?
A.
अगर आप माहिर एक्टर हैं तो आप कभी पकड़े नही जाएंगे। अच्छे एक्टर की यही पहचान है कि वो किसी भी किरदार को करे, लेकिन पकड़ा नहीं जाए। बैडमिंटन को आप 15 साल नही दे सकते, लेकिन आप एक्टर हैं और अगर आप 6 महीने मेहनत-मशक्कत करते हैं तो आप बखूबी वह किरदार निभा जाते हैं। कोर्ट पर, घर पर ,जहां साइना की जरूरत होती है, वहां परिणीति खड़ी हो जाती हैं। मुझे यही तो चाहिए। बैडमिंटन सीखने के लिए 15 साल कौन देगा? जो अच्छा एक्टर होता है, शार्प एक्टर होता है, वह यह समझता है कि क्या जरूरी है? और कितना जरूरी है? किस तरह बखूबी निभाना ओर दिखाना है, जो परिणीति ने बहुत अच्छे से किया है।

Q. परिणीति को साइना जैसी दिखाने के लिए फिजिकल एक्टिविटी कराई या VFX का सहारा लिया?
A.
देखिए रणवीर सिंह हीरो हैं और उनकी फिल्मों का बजट भी ज्यादा होता है। इसलिए उनके प्रोड्यूसर पैसे बहा सकते हैं। VFX पर बड़ा बिल बना सकते हैं। हम तो बेटी पर फिल्म बना रहे हैं, बेटे पर नहीं। जब आप बेटी पर फिल्म बनाते हैं तो बजट भी वैसा ही होता है। ये अच्छी बात नहीं है, लेकिन यही सच्चाई है। अरे ये हीरोइन वाली फिल्म है कौन आएगा? वो रणवीर सिंह नहीं है। वो परिणीति चोपड़ा है, जो माहिर हैं किरदार निभाने में। जब परिणीति लंदन गईं तो उनके कोच और को-एक्टर ईशान नकवी भी उनके साथ प्रैक्टिस के लिए गए थे। हमारी जेब में इतने पैसे नहीं हैं कि हम VFX पर पैसे बहाएं।

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