महाराष्ट्र की शर्मनाक तस्वीर: बीड में गांव वालों ने कोरोना से मारे गए लोगों को श्मशान लाने का विरोध किया, टीम ने दूसरी जगह एक ही चिता पर 8 शव जलाए

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बीड4 घंटे पहले

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एक ही चिता पर 8 शव जलाने के मामले में अधिकारियों का कहना है कि ऐसा जगह की कमी के चलते किया गया।

कोरोना वायरस के साथ-साथ अब अमानवीयता की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। महाराष्ट्र के बीड से ऐसी ही एक घटना बुधवार शाम सामने आई। यहां कोरोना से मरने वाले 8 लोगों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर कर दिया गया। प्रशासन का तर्क है कि लोग इन मरीजों के शव श्मशान घाट में जलाने नहीं दे रहे थे, इसलिए दूसरी जगह ढूंढकर उनका क्रिया कर्म किया गया।

अधिकारियों को अंत्येष्ठि के लिए जगह तलाशनी पड़ी
ये शर्मनाक घटना बीड जिले के अंबाजोगाई नगरपालिका के पठाण मांडवा गांव की है। यहां कोरोना संक्रमित मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए अलग से जगह तय की गई है। अंबाजोगई नगर परिषद के प्रमुख अशोक साबले ने बताया कि यहां के लोगों ने श्मशान घाट में कोरोना मरीजों के अंतिम संस्कार का विरोध किया। इसलिए अधिकारियों ने अंत्येष्टि के लिए दूसरी जगह ढूंढी। नए स्थान में जगह की कमी के कारण सभी का अंतिम संस्कार एक साथ कर दिया गया।

बड़ी चिता बनाकर किया अंतिम संस्कार
अशोक साबले ने बताया कि नगर से 2 किलोमीटर दूर मांडवा रोड पर अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया गया। जगह कम होने के कारण मंगलवार को बड़ी चिता बनाई और इस पर 8 शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। मरीजों की लाश एक-दूसरे से निश्चित दूरी पर रखी गई थी।

प्रशासन का कहना है कि कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है और इसके चलते मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है, इसलिए अस्थायी श्मशान घाट को मानसून शुरू होने से पहले डेवलप किया जाएगा। इसे वाटर प्रूफ बनाने की तैयारी का जा रही है। बीड में मंगलवार को कोरोना के 716 मामले सामने आए हैं। अब तक यहां 28,491 कोरोना मरीज मिल चुके हैं और 672 लोगों की मौत हुई है।

बीड का अंबाजोगाई कोरोना का हॉटस्पॉट
बीड के अंबाजोगाई में 4 दिनों में 500 के आसपास नए पॉजिटिव केस सामने आए हैं। कोरोना के बढ़ते संकट पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने जिले में 10 दिनों का लॉकडाउन लगाया था। यहां अब तक 25436 कोरोना मरीज ठीक हो चुके हैं।

भुसावल में अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां नहीं
जलगांव जिले के भुसावल में मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियों की कमी पड़ गई है। तापी नदी के पास मौजूद श्मशान भूमि में हर दिन आमतौर पर 10 से 15 मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है। फिलहाल ये संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है और शवों के लिए सूखी लकड़ियां तक नहीं मिल पा रही है। गांवों से लकड़ियां मंगवाकर अंतिम संस्कार करवाया जा रहा है। श्मशान में शवों की लाइन इतनी लंबी है कि चिता जलाने के लिए लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

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