महिंद्रा में बदलाव: 28 सालों से साथ दे रहे गोयनका 2 अप्रैल को रिटायर, एक दिन पहले मोबिलिटी सर्विस सेक्टर के प्रेसिडेंट भी करेंगे गुडबाय

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नई दिल्ली11 मिनट पहले

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एसयूवी सेगमेंट में देश की सबसे बड़ी कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के लिए नया फाइनेंशियल ईयर कई बदवाल के साथ शुरू होने वाला है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन गोयनका 2 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। वे 28 सालों से महिंद्रा ग्रुप के साथ जुड़े हुए हैं। नवंबर 2016 में उन्होंने कंपनी के एमडी का पद संभाला था। उनकी जगह कंपनी के मौजूदा डिप्टी डायरेक्टर और ग्रुप चीफ फाइनेंशियल, अनीश शाह लेंगे।

आनंद महिंद्रा ने नवंबर 2020 में गैर-कार्यकारी चेयरमैन की भूमिका को अपनाया था। महिंद्रा ग्रुप के इतिहास में शाह पहले पेशेवर एमडी और सीईओ होंगे। वह महिंद्रा ग्रुप के सभी बिजनेस के ऑपरेशंस के लिए जिम्‍मेदार होंगे। महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड ने 20 दिसंबर, 2019 को अपने शीर्ष प्रबंधन में उत्‍तराधिकारियों की घोषण की थी।

मार्च 2021 में महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के मोबिलिटी सर्विस सेक्टर के प्रेसिडेंट वीएस पार्थसारथी भी इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने मेंबर ऑफ ग्रुप एग्जीक्यूटिव बोर्ड के पद से भी इस्तीफा दे दिया है। 1 अप्रैल, 2021 को वे पदमुक्त हो जाएंगे। इस्तीफे की वजह उन्होंने निजी कारण बताई है। उनकी जगह भी अनीश शाह लेंगे।

आइए सबसे पहले महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप से जुड़े इन सभी मेंबर्स के बारे में जानते हैं।

  • पनव गोयनका: अक्टूबर 1993 में महिंद्रा को जनरल मैनेजर (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) के तौर पर ज्वॉइन किया था। उन्हें अप्रैल 2003 में ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बनाया गया। सितंबर 2005 में वे ऑटोमोटिव सेक्टर के प्रेसिडेंट बने। अप्रैल 2010 तक ऑटोमोटिव एंड फार्म इक्यूपमेंट सेक्टर के प्रेसिडेंट रहे। 2013 में उन्हें महिंद्रा एंड महिंद्रा के एक्जीक्युटिव डायरेक्ट के तौर पर नियुक्त किया गया। अप्रैल 2014 में उन्हें टू-व्हीलर बिजनेस की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई। नवंबर 2016 उन्होंने कंपनी के एमडी का पद संभाला।
  • अनीश शाह: अपने करियर की शुरुआत उन्होंने मुंबई में सिटीबैंक के साथ की थी। 2015 में ग्रुप प्रेसिडेंट (स्‍ट्रेटजी) के तौर पर महिंद्रा ग्रुप ज्‍वॉइन किया था। इस पद पर रहते हुए उन्‍होंने स्‍ट्रेटजी डेवलपमेंट को लीड किया। डिजिटलीकरण और डेटा साइंस जैसी क्षमताओं का विकास किया। ग्रुप कंपनियों के बीच सामंजस्‍य स्‍थापित किया। ग्रुप के जोखिम और प्रदर्शन की समीक्षा की जिम्‍मेदारी उठाई। महिंद्रा ग्रुप में आने से पहले वे जीई कैपिटल इंडिया के प्रेसिडेंट और सीईओ थे। जीई के साथ उन्‍होंने 14 साल तक काम किया। शाह ने बैंक ऑफ अमेरिका के यूएस डेबिट प्रोडक्‍ट बिजनेस का भी नेतृत्‍व किया।
  • वीएस पार्थसारथी: अपने करियर की शुरुआत मोदी जेरॉक्स में बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर की थी। बाद में उन्हें कंपनी में एसोसिएट डायरेक्ट बना दिया गया। महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप को उन्होंने 2000 में सीएफओ के तौपर ज्वॉइन किया था। उनके पास एचआर, फाइनेंस, M&A, आईटी और इंटरनेशनल ऑपरेशंस जैसे डिपार्टमेंट थे। शानदार काम के चलते उन्हें कंपनी में कई अवॉर्ड्स भी मिले। बाद में उन्हें मोबाइल सर्विस सेक्टर के प्रेसिडेंट के तौर पर नियुक्त किया गया। वे मेंबर ऑफ ग्रुप एग्जीक्यूटिव बोर्ड में भी शामिल हुए।

बदलाव का कंपनी का पर क्या असर होगा?

ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कहा कि हम 75 सालों से लगातार आगे बढ़ रहे हैं इसका कारण सही समय पर सही कदम उठाना और बदलाव लाना है। अनीश महिंद्रा ग्रुप के लिए एकदम सही लीडर हैं। एमडी और सीईओ के तौर पर वे हमारे ग्‍लोबल ऑपरेशन, ट्रांसफोर्मेशन एजेंडा सहित महिंद्रा ग्रुप के सभी कारोबारों को देखेंगे। हालांकि, अनीश का मानना है कि वे घाटे वाले बिजनेस को नहीं करेंगे।

वहीं, पार्थसारथी के इस्तीफे पर आनंद ने कहा कि उन्होंने लंबे वक्त तक अपने अनुभव के साथ कंपनी को आगे बढ़ाने में मदद की है। वे कंसल्टेंट के तौर पर कंपनी के बिजनेस को बढ़ाने में मदद करेंगे।

महिंद्रा के लिए साल की शुरुआत अच्छी नहीं रही

  • फोर्ड के साथ ब्रेकअप: साल के पहले ही दिन अमेरिकी ऑटो मैन्युफैक्चरिंग कंपनी फोर्ड मोटर कंपनी ने महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ ऑटो जॉइंट वेंचर को रद्द कर दिया। उसने कहा कि भारत में वो स्वतंत्र तौर पर काम करेगी। दोनों कंपनियों ने अक्टूबर 2019 में इस रिलेशन को लेकर समझौता किया था, लेकिन 31 दिसंबर, 2020 को ये खत्म हो गया। इस साल के पहले ब्रेकअप का नाम दिया गया।
  • सांगयोंग डिफॉल्टर साबित हुई: महिंद्रा की कोरियाई सहायक यूनिट सांगयांग मोटर कंपनी करीब 408 करोड़ रुपए का कर्ज नहीं चुका सकी। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने शेयर बाजार को बताया कि सांगयांग मोटर कंपनी पर कुल 100 अरब कोरियाई वॉन का कर्ज बकाया है। कंपनी ने बताया कि SYMC पर 60 अरब वॉन जेपी मॉर्गन चेस बैंक का बकाया है। इसके बाद इस साल अप्रैल में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने SYMC में फ्रेश इक्विटी डालने के प्रस्ताव को रद्द कर दिया। सांगयोंग 2017 से घाटे में चल रही थी।

कैलेंडर ईयर 2020 में महिंद्रा को 37% का नुकसान
कोरोना काल में महिंद्रा की गाड़ियों की सेल्स काफी कम हो गई। कंपनी ने कैलेंडर ईयर 2020 में 1,36,500 यूनिट की बिक्री की। जबकि कैलेंडर ईयर 2019 में उसने 2,19,682 की बिक्री की थी। यानी उसे 37.89% के साथ 83,182 यूनिट का नुकसान हुआ। जबकि 2020 में मारुति को 18.32% और हुंडई को 16.98% का नुकसान हुआ था। टाटा, किआ और MG ऐसी कंपनियां रहीं जिनकी सेल्स पॉजिटिव रही। कंपनी का भारत में कुल मार्केट शेयर करीब 5 से 6% है।

SUV सेगमेंट में नंबर-3 पर महिंद्रा

हुंडई 25%
किआ 19%
महिंद्रा 18%
मारुति 14%
टाटा 9%

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