ये सजा मिसाल बनेगी: बांग्लादेशी नौकरानी का कत्ल करने वाली सऊदी महिला को सजा-ए-मौत का ऐलान, पति-बेटा भी जेल जाएंगे

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रियाद3 घंटे पहले

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यह फोटो बांग्लादेश की अबिरोन बेगम (40) का है। वे सऊदी अरब के रियाद में एक शेख परिवार में नौकरानी थीं। 2019 में उन्हें कत्ल कर दिया गया। अब रियाद की क्रिमिनल कोर्ट ने बेगम के कत्ल के जुर्म में उनकी मालकिन को सजा-ए-मौत का फैसला सुनाया है। (फाइल)

सऊदी अरब में संभवत: पहली बार विदेशी नौकरानी के कत्ल के जुर्म एक स्थानीय महिला को सजा-ए-मौत का फैसला सुनाया गया। दोषी महिला के पति और बेटे को अलग सजा दी जाएगी। मारी गई महिला बांग्लादेश की रहने वाली थी और उसका नाम अबिरोन बेगम था। जिस महिला को कत्ल का दोषी पाया गया है, उसका नाम आयशा अल जिगानी है।

अबिरोन मार्च 2017 में एक एजेंट के जरिए सऊदी अरब गई थीं। उनका मकसद बुजुर्ग मां-बाप को बेहतर जिंदगी देने के लिए पैसा कमाना था। 24 मार्च 2019 को उनकी मौत की खबर सामने आई।

एजेंट ने भेजा था सऊदी
बांग्लादेश में कमाई न होने की वजह से 40 साल की अबिरोन किसी खाड़ी देश में काम की तलाश में थीं। वे एक एजेंट से मिलीं और कमीशन देने की शर्त पर उन्हें सऊदी अरब में नौकरानी (Maid) का जॉब मिल गया। उनके एक रिश्तेदार ने न्यूज एजेंसी से कहा- अबिरोन बुजुर्ग मां-बाप का सहारा बनना चाहती थीं। इसलिए वे सऊदी गईं। वहां जिस घर में वे काम करती थीं, वहां के मालिकों ने उन पर बेतहाशा जुल्म ढाने शुरू कर दिए। ये सिलसिला नौकरी शुरू करने के दो हफ्ते बाद ही शुरू हो गया। हमने जब भी उनसे फोन पर बातचीत की, वे हमेशा रोते हुए सुनाई दीं। हमने एजेंट्स के उन्हें वापस लाने को कहा। सिर्फ लाश मिली।

मालकिन जुल्म ढाती रही
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबरोन पर बेतहाशा जुल्म ढाए गए। अब दोषी पाई गई आयशा उससे जानवरों से भी बदतर सलूक करती थी। उसका पति और बेटा भी इसमें साथ देते थे। आयशा के पति को भी तीन साल कैद में रहना होगा। रियाद की क्रिमिनल कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी भी दोषी को जमानत नहीं दी जाएगी।

ये फैसला मिसाल बनेगा
बांग्लादेश के फॉरेन मिनिस्टर एके अब्दुल मोमेन ने कहा- हम सऊदी अरब की अदालत द्वारा दिए गए फैसले का स्वागत करते हैं। उसने मालिकों द्वारा विदेशी नौकरों पर जुल्म करने वालों को चेतावनी दी है। यह फैसला मिसाल बनेगा।

1991 से मार्च 2020 तक करीब 3 लाख बांग्लादेशी महिलाएं सऊदी अरब नौकरी के लिए गईं। इनमें से ज्यादातर जब लौटीं तो उनके साथ जुल्म और हैवानियत की दर्दनाक दास्तां थीं। 5 साल में करीब 70 बांग्लादेशी महिलाओं की सिर्फ लाशें ही सऊदी से लौट पाईं। इनमें से 50 ने खुदकुशी की थी।

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