रिलायंस-फ्यूचर डील का असर: अमेजन-फ्यूचर कूपंस डील पर संकट के बादल, मंजूरी के आदेश पर पुनर्विचार कर सकती है CCI

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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  • CCI ने नवंबर 2019 में दी थी अमेजन फ्यूचर कूपंस डील को मंजूरी
  • रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप डील को रोकने के लिए हर प्रयास कर रही अमेजन

रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप के बीच हुई डील में अडंगा लगाने वाली अमेजन का यह दांव अब उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कहा है कि वह अपने 28 नवंबर, 2019 के उस आदेश पर पुनर्विचार कर सकती है, जिसमें उसने अमेजन और फ्यूचर कूपंस लिमिटेड (FCL) के बीच समझौते को मंजूरी दी थी। 2019 की फाइलिंग में अमेजन ने CCI को यह नहीं बताया था कि जब उसने फ्यूचर कूपंस में निवेश किया था तो उसने बिग बाजार और अन्य कंपनियों के प्रमोटरों को भारत में किसी अन्य रिटेलर के साथ साझेदार बनाने या सहयोग करने एवं बिक्री पर रोक लगाई थी।

CCI ने दी थी सशर्त मंजूरी

CCI ने जो मंजूरी प्रदान की थी वह सशर्त थी। CCI ने अपने आदेश के पॉइंट 16 में कहा था है कि अगर खरीदार की ओर से दी गई जानकारी किसी भी वक्त गलत पाई गई तो उसी समय यह आदेश निरस्त हो जाएगा। CCI ने कहा था कि यदि एक्ट के किसी प्रावधान का उल्लंघन होता है तो भविष्य में होने वाली किसी भी कार्रवाई के दौरान इस मंजूरी का हवाला नहीं दिया जाना चाहिए।

रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप डील को रोकने की मांग कर रही है अमेजन

अमेजन ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुई डील को रोकने की मांग की है। इसके लिए अमेजन ने फ्यूचर कूपंस के बीच हुई डील का हवाला दिया है। अमेजन का तर्क है कि 2019 में फ्यूचर यूनिट के साथ हुए एक अलग सौदे में यह क्लॉज़ था कि फ्यूचर ग्रुप रिलायंस सहित “प्रतिबंधित व्यक्तियों” की सूची में किसी को भी अपनी रिटेल संपत्ति नहीं बेच सकता है। हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने फ्यूचर को रिलायंस के साथ डील पर यथास्थिति बनाए रखने को कहा था। लेकिन डबल बेंच ने सिंगल बेंच का आदेश पर रोक लगा दी है। अब अमेजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

ED ने अमेजन के खिलाफ जांच शुरू की

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान अमेजन की ओर से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कानूनों के उल्लंघन की आशंका जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले की संबंधित एजेंसियों को जांच करनी चाहिए। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमेजन के खिलाफ FDI कानूनों के उल्लंघन के लिए अपनी जांच शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले की ED की जांच के बाद इस बात की संभावना बढ़ गई है कि CCI भी ED के राह पर चल सकती है।

अगस्त में हुई थी रिलायंस-फ्यूचर डील

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने अगस्त में किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप को खरीदने की घोषणा की थी। यह सौदा 24,713 करोड़ रुपए में हुआ था। इस सौदे के तहत फ्यूचर ग्रुप का रिटेल, होलसेल, लॉजिस्टिक्स एंड वेयरहाउसिंग कारोबार रिलायंस को मिलेगा। रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड और रिलायंस रिटेल एंड फैशन लाइफस्टाइल लिमिटेड ने फ्यूचर ग्रुप के इन कारोबारों को खरीदा है। रिलायंस ने देश में रिटेल कारोबार के विस्तार के लिए यह सौदा किया था।

SEBI दे चुकी है सौदे को मंजूरी

रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुए सौदे को सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने मंजूरी दे दी है। SEBI ने अमेजन की आपत्ति के बावजूद यह मंजूरी दी है। इससे पहले कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) भी इस सौदे को मंजूरी दे चुका है। हाल ही में फ्यूचर ग्रुप के फाउंडर और CEO किशोर बियानी ने कहा था कि SEBI की मंजूरी के बाद रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप डील दो महीने में पूरी हो जाएगी। किशोर बियानी ने कहा था कि अमेजन के साथ विवाद पर सुनवाई और रिलायंस के साथ डील, दोनों साथ चलती रहेंगी।

सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत लगा चुकी है डील पर रोक

रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप डील के विरोध में अमेजन ने सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के एकमात्र मध्यस्थ वीके राजा ने अमेजन की याचिका पर इस डील पर रोक लगा दी थी। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अब इस मामले में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पीठ अंतिम निर्णय करेगी। इस पीठ में फ्यूचर और अमेजन की ओर से एक-एक सदस्य नामित होंगे। एक सदस्य तटस्थ होगा।

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