10 दिन में दूसरा नक्सली हमला: ​​​​​​​बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़; 5 जवान शहीद, 9 नक्सली भी मारे गए

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बीजापुर7 घंटे पहले

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इसमें 5 जवान घायल हैं, जबकि कुछ जवानों के शहीद होने की खबर है।

  • तर्रेम क्षेत्र के सिलगेर के जंगल में हुई मुठभेड़, एक महिला नक्सली के भी मारे जाने की खबर
  • CRPF, DRG, जिला पुलिस बल और कोबरा बटालियन के जवान निकले थे सर्चिंग पर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में शनिवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई। इसमें 5 जवान शहीद हो गए हैं। करीब 3 घंटे से ज्यादा चली मुठभेड़ में कोबरा के 1, बस्तरिया बटालियन के 2 और DRG के 2 जवान शहीद हो गए। बस्तर IG पी सुदंरराज ने बताया कि अभी तक 9 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है, जबकि 15 से ज्यादा घायल हैं। स्थिति स्पष्ट करने में और समय लग सकता है। शनिवार देर रात तक 22 घायल जवानों को इलाज के लिए बीजापुर लाया जा चुका था।

घटनास्थल पर 250 से ज्यादा नक्सली हो सकते हैं। मरने वालों में एक महिला नक्सली भी है। मुठभेड़ तर्रेम थाना क्षेत्र के जंगलों में हुई। मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के 17 जवान अब घायल हो चुके हैं। इनमें से 7 को एयरलिफ्ट कर रायपुर ले जाया गया।

नक्सली लीडर हिड़मा के गांव में हुई मुठभेड़
SP कमल लोचन कश्यप ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। मुठभेड़ झीरम हमले के मास्टरमाइंड हिड़मा के गांव में हुई है। हमला करने वाले नक्सली उसी की टीम के सदस्य थे। काफी लंबे समय से गांव में नक्सलियों का जमावड़ा लग रहा था। इसकी सूचना पर जवान पहुंचे थे।

ऑपरेशन के लिए भेजी गई थी पुलिस पार्टी
जानकारी के मुताबिक, 2 अप्रैल की रात बीजापुर और सुकमा से DRG, STF, CRPF और कोबरा बटालियन के जवानों को नक्सलियों का गढ़ कहे जाने वाले दक्षिण बस्तर इलाके में ज्वाइंट ऑपरेशन के लिए भेजा गया था। इस पार्टी में बीजापुर के तर्रेम से 760, उसूर से 200, पामेड़ से 195, सुकमा के मिनपा से 483 और नरसापुरम से 420 जवान रवाना किए गए थे। अगले दिन शनिवार दोपहर करीब 12 बजे सुकमा-बीजापुर बार्डर पर सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र के जोनागुड़ा गांव के पास नक्सलियों से मुठभेड़ हुई।

मुठभेड़ झीरम हमले के मास्टरमाइंड हिड़मा के गांव में हुई। हमला करने वाले नक्सली उसी की टीम के सदस्य थे।

मुठभेड़ झीरम हमले के मास्टरमाइंड हिड़मा के गांव में हुई। हमला करने वाले नक्सली उसी की टीम के सदस्य थे।

रेस्क्यू के लिए जंगल में चॉपर भेजे गए
करीब चार से पांच घंटे चली मुठभेड़ शाम 5 बजे तक खत्म हो गई। इसके बाद बैकअप के लिए एक्स्ट्रा फोर्स भेजी गई है। वहीं, शहीद जवानों के शव और घायल जवानों को रेस्क्यू करने के लिए हेलीकॉप्टर भी भेजे गए। शाम तक मुठभेड़ के बारे में आधिकारिक जानकारी दिए जाने की उम्मीद है। शहीद जवानों का पोस्टमार्टम रविवार को होगा।

23 मार्च को नक्सली ब्लास्ट में 5 जवान शहीद हुए थे
छत्तीसगढ़ में 10 दिन के अंदर यह दूसरा नक्सली हमला है। इससे पहले 23 मार्च को हुए हमले में भी 5 जवान शहीद हुए थे। यह हमला नक्सलियों ने नारायणपुर में IED ब्लास्ट के जरिए किया था। तर्रेम थाने से CRPF, DRG, जिला पुलिस बल और कोबरा बटालियन के जवान संयुक्त रूप से सर्चिंग पर निकले थे। इसी दौरान दोपहर में सिलगेर के जंगल में घात लगाए नक्सलियों ने हमला कर दिया। इस पर जवानों की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई।

गंगालूर क्षेत्र के चेरपाल के पास मोदीपारा में CRPF 85 बटालियन के जवानों ने 8 किलो का IED विस्फोटक बरामद किया है। इसके बाद इसे नष्ट कर दिया गया।

गंगालूर क्षेत्र के चेरपाल के पास मोदीपारा में CRPF 85 बटालियन के जवानों ने 8 किलो का IED विस्फोटक बरामद किया है। इसके बाद इसे नष्ट कर दिया गया।

जवानों को निशाना बनाने के लिए लगाया 8 किलो का IED बरामद
दूसरी ओर गंगालूर क्षेत्र के चेरपाल के पास मोदीपारा में CRPF 85 बटालियन के जवानों ने 8 किलो का IED विस्फोटक बरामद किया है। नक्सलियों ने इसे जवानों को निशाना बनाने के लिए प्लांट किया था। यह विस्फोटक जवानों ने शनिवार सुबह करीब 7.30 बजे बरामद किया है। इसके बाद इसे विस्फोट कर नष्ट कर दिया गया।

23 मार्च को नक्सलियों ने नारायणपुर में किया था ब्लास्ट, 5 जवान हुए थे शहीद
10 दिन पहले 23 मार्च को नक्सलियों ने नारायणपुर जिले में DRG जवानों से भरी बस में ब्लास्ट कर दिया। इस हमले में 5 जवान शहीद हो गए थे, जबकि 14 घायल हुए थे। ब्लास्ट के दौरान बस में 24 जवान सवार थे। सूचना मिलते ही बैकअप फोर्स को मौके पर रवाना किया गया था। सभी जवान एक ऑपरेशन में शामिल होने के बाद लौट रहे थे।

शांति वार्ता प्रस्ताव भेजने के बाद से हमले तेज हुए
नक्सलियों ने 17 मार्च को शांति वार्ता का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा था। नक्सलियों ने विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि वे जनता की भलाई के लिए छत्तीसगढ़ सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने बातचीत के लिए तीन शर्तें भी रखी थीं। इनमें सशस्त्र बलों को हटाने, माओवादी संगठनों पर लगे प्रतिबंध हटाने और जेल में बंद उनके नेताओं की बिना शर्त रिहाई शामिल थीं।

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