8 घंटे में 9 मौत वाले अस्पताल से रिपोर्ट: NICU में ईसीजी मशीन का चार्जिंग सिस्टम खराब, बच्चा वार्ड में नर्सिंग स्टाफ सोता मिला

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12 मिनट पहलेलेखक: मुकेश सोनी

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कोटा के जेके लोन अस्पताल के बच्चा वार्ड में सोता पाया गया स्टाफ।

  • दैनिक भास्कर टीम ने कोटा के जेके लोन अस्पताल में लगातार मौतों के बाद रात में जायजा लिया
  • लापरवाही जस की तस नजर आईं, एक वार्मर पर दो से तीन बच्चों काे रखना पड़ रहा है

कोटा के जेके लोन अस्पताल में 9 दिसंबर को 8 घंटे में 9 नवजातों की मौत का मामला सामने आने के बाद सरकारें तमाम दावे करती रहीं, लेकिन हालात नहीं बदले। दैनिक भास्कर टीम 10 दिसंबर अस्पताल पहुंची तो नजारा चौंकाने वाले थे। अस्पताल में स्टाफ सोता मिला।

पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (E-PICU) के पास बने वार्ड में नर्सिंग स्टाफ नही मिला।

पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (E-PICU) के पास बने वार्ड में नर्सिंग स्टाफ नही मिला।

पड़ताल में सामने आया कि NICU में ईसीजी मशीन का चार्जिंग सिस्टम खराब है। चार्जर खराब होने से मशीन बंद है। गायनिक वार्ड से पोर्टेबल मशीन मंगवाकर ईसीजी किया जा रहा है। नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट (NICU) में एक वार्मर पर दो से तीन नवजात थे। ऊपर चाइल्ड वार्ड के नर्सिंग रूम में एक कर्मी सोता हुआ मिला।

बच्चा वार्ड का पलंग खाली मिला तो कुछ लोग लेटे नजर आए।

बच्चा वार्ड का पलंग खाली मिला तो कुछ लोग लेटे नजर आए।

E-PICU में नर्सिंगकर्मी तैनात मिला। पास में बने जनरल वार्ड में एक भी नर्सिंग स्टाफ नहीं था। वार्ड में तीन पुरुष पलंग पर सोते हुए मिले।

नवजात की मौत की खबर सुन महिला की तबीयत खराब हो गई।

नवजात की मौत की खबर सुन महिला की तबीयत खराब हो गई।

केस 1: बच्चे का बुखार नहीं उतर रहा, बमुश्किल मिला ब्लड
रावतभाटा से प्यारचंद अपने बच्चे को जेके लोन अस्पताल लाए थे। दोपहर 3 बजे अस्पताल पहुंचे। 2 साल के बच्चे के खून चढ़ना था। काफी जद्दोजहद के बाद खून की व्यवस्था की। बच्चे के रात में खून चढ़ाया गया। खून पूरा चढ़ने के बाद भी उसे हटाने कोई नहीं आया। वार्ड में कोई स्टाफ नहीं था। प्यारचंद खुद पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (E-PICU) में गए। नर्सिंगकर्मी को समस्या बताई, तब जाकर वह पहुंचा। बच्चे का बुखार नहीं उतर रहा था। यह बात जब कर्मी को बताई तो उसने कहा कि धीरे से ही बुखार उतरेगा।

रजिस्ट्रेशन काउंटर के बाहर सोते हुए परिजन।

रजिस्ट्रेशन काउंटर के बाहर सोते हुए परिजन।

केस 2 : बच्चे की चिंता होने से खुद बुलाने जाते हैं स्टाफ को
NICU के बाहर गैलरी में एक परिवार बैठा मिला। बूंदी जिले के एक कस्बे से आए थे। उन्होंने बताया कि 26-27 दिन के नवजात के पेट मे मवाद थी। 4 दिन पहले ही जेके लोन आए हैं। नवजात का ऑपरेशन हो चुका है। अभी NICU में भर्ती है। उसे वॉर्मर में रखा गया है। यहां एक वार्मर में दो बच्चों रखा गया है। इसलिए नवजात के पास हमेशा अलर्ट रहना पड़ता है। जरूरत पड़ने पर स्टाफ को बुलाना पड़ता है। ​​​​​​​

केस 3: नवजात की मौत होते ही नानी की तबीयत बिगड़ी
NICU के बाहर गैलरी में एक परिवार के नवजात की मौत हो गई। जिला अस्पताल में दो दिन पहले प्रसव हुआ था। नवजात रो नहीं रहा था। उसे जेके लोन भर्ती कराया गया। 10 दिसंबर रात करीब 11 बजे नवजात की मौत हो गई। नवजात की मौत की सूचना पर नानी की तबीयत खराब हो गई। वो गैलरी में बेहोश होकर गिर गई। वहां मौजूद लोगों ने महिला को संभाला। गार्ड से डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ को बुलाने को कहा। सूचना देने के बावजूद ना तो डॉक्टर पहुंचे और न ही नर्सिंग स्टाफ।

जैसे-तैसे परिजन महिला को लेकर E-PICU तक पहुंचे। E-PICU के बाहर पत्थर की बेंच पर लिटाया। यहां के नर्सिंग स्टाफ ने परिजन की मदद की। करीब 45 मिनट तक अस्पताल में पड़ताल में रजिस्ट्रेशन काउंटर के सामने लोग सोते हुए नजर आए।

बच्चे के पास अलर्ट खड़े परिजन

बच्चे के पास अलर्ट खड़े परिजन

मंत्री-अफसर फीडबैक लेते रहे, व्यवस्थाएं ठप
जेके लोन अस्पताल में 9 नवजात बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मचा। कलेक्टर, कमिश्नर, चिकित्सा मंत्री और नगरीय विकास मंत्री ने अधिकारियों से फीडबैक लिया। व्यवस्थाओं और संसाधनों की जानकारी जुटाई। मंत्री जी के निर्देश के बाद कमिश्नर और कलेक्टर ने अस्पताल का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उसके बाद भी अस्पताल प्रशासन और हालात जस के तस नजर आए।

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